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शहर में बनकर तैयार हो गई 35 लाख से ज्यादा की पीओपी गणेश प्रतिमाएं, निर्माण नहीं रोका तो इन्हें बेचने से भी नहीं रोक पाएंगे
मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा पीओपी की गणेश प्रतिमाओं को लेकर जारी निर्देश शहर में बेअसर नजर आ रहे हैं। इसलिए कि शहर में अवंतिपुरा, निकास मार्ग, देवास रोड-नानाखेड़ा मार्ग, नीलगंगा-कवेलू कारखाना क्षेत्र, नलिया बाखल में पीओपी की प्रतिमाएं बनाई जा रही है। व्यापारी बताते हैं 35 लाख से ज्यादा की प्रतिमाएं शहर में बन चुकी हैं। शहर में ताे ज्यादातर मिट्टी की ही प्रतिमा बेचेंगे, पीओपी की कम। बहरहाल इन तमाम परिस्थितियों से ये लगता है कि पीओपी को लेकर जिला प्रशासन और निगम द्वारा काेई बड़ी कार्रवाई नहीं करने से व्यापारी भी निश्चिंत हैं। सवाल उठता है कि ये ही हालात रहे तो प्रदूषण रुकेगा कैसे? पीओपी की प्रतिमाओं के प्रदूषण को रोकने के उद्देश्य से हाल ही में बोर्ड ने संभाग के सभी नगरीय निकायों को पत्र लिखकर ऐसी प्रतिमाओं के निर्माण और बिक्री पर रोक के निर्देश दिए हैं।
शहर के दो नजारे…जहां पीओपी की गणेश प्रतिमाएं बनाई जा रही हैं
नीलगंगा क्षेत्र में पीओपी से प्रतिमा निर्माण
यहां परिहार परिवार कई महीनों से पीओपी की मूर्तियां बना रहा है। मुखिया महेंद्र परिहार कहते हैं कि 3 से 18 फीट तक की 500 प्रतिमा बना चुके हैं, जिनकी कीमत चार लाख रुपए है। ज्यादातर गुजरात व महाराष्ट्र से मिले आॅर्डर पर बनाई है। बेबाकी से कहते हैं कि मालूम है पीओपी प्रतिबंधित है। वे जो प्रतिमाएं बना रहे हैं वे भी पीओपी की हैं। तर्क देते हैं कि इस बार उन्होंने पीओपी में चाॅक मिट्टी भी मिलाई है ताकि ये जल्द गल जाए। शहर में बेचने के लिए मिट्टी व पीओपी दोनों की ही प्रतिमाएं बना रहे हैं। कहते हैं कि शासन को चाहिए कि जब कारीगर लाखों की प्रतिमाएं बना लेते हैं, तब उन्हें नष्ट न करें।
देवास रोड-नानाखेड़ा मार्ग पर भी निर्माण
यहां एक परिवार हर वर्ष पीओपी की गणेश प्रतिमाएं बनाता है। इस बार भी बना रहा है। मुखिया गंगाराम व उनकी प|ी कहती हैं कि 45 बड़ी मूर्तियां बना चुके हैं। महिदपुर, नागदा व बड़नगर क्षेत्रों से मिले आॅर्डर पर बनाई है। एक सवाल के जवाब में कहते हैं कि सभी पीओपी की है लेकिन इनमें चाक मिट्टी मिलाई है। पीओपी प्रतिबंधित है के जवाब में दंपती कहते हैं हर बार ये डर बताया जाता है। हम कारीगर हैं, कहां जाएं, क्या करें। अफसर आएंगे तो उनके हाथ जोड़ लेंगे। जो माल बनाया है, जल्द ही इसे ग्राहकों तक भेज देंगे। इसके बाद गमले-खिलौने बनाने लगेंगे।
सख्त कार्रवाई के लिए संयुक्त दल बना रहे हैं
– शशांक मिश्र, कलेक्टर
बोर्ड के आदेशानुसार कार्रवाई करेंगे
पीओपी प्रतिमाओं की हम भी चैकिंग करने जाएंगे
इसलिए रोकना जरूरी…
यह तस्वीर 26 सितंबर 2018 की है। रामघाट पर शिप्रा नदी में पीओपी की गणेश प्रतिमा विसर्जन के तीन दिन बाद ऐसी ही थी। पीओपी पानी में आसानी से नहीं घुलता है। पानी प्रदूषित कर देता है। इसलिए इस बार इन्हें निर्माण से ही रोकना जरूरी है।
मिट्टी के गणेश कल से
लोकमान्य तिलक गणेश उत्सव महाआयोजन समिति का मिट्टी के गणेश अभियान शनिवार से शुरू होगा। संयोजक अनिल जैन कालूहेड़ा के अनुसार दोपहर 2.30 बजे अकादमी संकुल में अभियान की शुरुआत होगी।